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Nelson Mandela Day: रंग भेद के खिलाफ लड़ते हुए 27 साल जेल में बिताए, फिर बने पहले अश्वेत राष्ट्रपति, जानें नेल्सन मंडेला के बारे में

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Nelson Mandela Day

Nelson Mandela Day

Nelson Mandela Day नेल्‍सन मंडेला( Nelson Mandela) की आज जयंती है. नेल्‍सन मंडेला को अफ्रीका का ‘ गांधी ’ कहा जाता था. दुनिया भर में शांति के दूत के रूप में प्रसिद्ध नेल्‍सन मंडेला का रंग भेद के खिलाफ लड़ाई में योगदान कोई भुला नहीं सकता. मंडेला गांधी की तरह ही अंहिसा के रास्ते पर चलने वाले व्यक्ति थे. मंडेला ने रंग भेद के खिलाफ लड़ते हुए 27 साल जेल में काटे थे. नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 18 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र द्वारा शान्ति के लिए नोबल पुरस्कार विजेता पूर्व दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के जन्म दिवस की याद के रूप में मनाया जाता है. इसका निर्णय 18 जुलाई 2010 को हुआ था. यह निर्णय एक ऐसे महान व्यक्ति को सम्मानित करने के लिए लिया गया जिसने आम लोगों की भलाई के लिए न सिर्फ काम किया अपितु उसकी कीमत भी चुकाई.
27 साल जेल में बिताए
1944 में अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल होने के बाद नेल्सन मंडेला ने रंगभेद के विरूद्ध आंदोलन छेड़ दिया. इसी वर्ष उन्होंने अपने मित्रों और सहयोगियों के साथ मिल कर अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की. 1947 में वे लीग के सचिव चुने ग. 1961 में मंडेला और उनके कुछ मित्रों के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा चला परन्तु उसमें उन्हें निर्दोष माना गया. 5 अगस्त 1962 को उन्हें मजदूरों को हड़ताल के लिए उकसाने और बिना अनुमति देश छोड़ने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. उन पर मुकदमा चलाया गया और 1964 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. 1964 से 1990 तक रंगभेद और अन्याय के खिलाफ लड़ाई के चलते उन्हें जेल में जीवन के 27 साल बिताने पड़े. उन्हें रॉबेन द्वीप के कारागार में रखा गया था जहां उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा था. इस दौरान उन्होंने गुप्त रूप से अपनी जीवनी लिखी. जेल में लिखी गई उनकी जीवनी 1994 में एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई जिसका नाम ‘ लॉन्ग वॉक टू फ्रीडम ’ है.
जेल से निकलने के बाद बने पहले अश्वेत राष्ट्रपति
27 साल कारागार में बिताने के बाद 11 फ़रवरी 1990 को उनकी रिहाई हुई. रिहाई के बाद समझौते और शान्ति की नीति द्वारा उन्होंने एक लोकतान्त्रिक एवं बहुजातीय अफ्रीका की नींव रखी. 1994 में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद रहित चुनाव हुए. अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस ने 62 प्रतिशत मत प्राप्त किए और बहुमत के साथ उसकी सरकार बनी. 10 मई 1994 को मंडेला अपने देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने.

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